प्रातः स्मरण मंत्र लिरिक्स | Pratah Smaran Mantra Lyrics

Pratah Smaran Mantra Lyrics

Pratah Smaran Mantra Lyrics In Hindi

卐 श्री गणेशाय नमः 卍

🌸प्रातः स्मरनम🌸

* प्रथम ब्रम्ह-मुहूर्त में उठने का अभ्यास करें। बड़ा सुनहरा समय है क्यूकि जब तक सूर्योदय नहीं है, तब तक माया सोती रहती है। योगी, महात्मा आसन, प्राणायाम आदि करते हैं। इसी समय हम उठने का अभ्यास करें। सूर्योदय हो जाने पर माया जाग जायेगी और वह भजन नहीं करने देगी। उठने के बाद सबसे पहले अपने हाथ मिलाकर हथेली के दर्शन करना चाहिए* 
और यह मंत्र बोलना चाहिए-

* कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती,
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ||१||

*बाद में बिस्तर पर बैठे-बैठे सर्व देवों कि स्तुति करें-

श्री गणेश स्तुति-
* गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपिथ जंबू फल चारु भक्षणं,
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ||२||

श्री शंकर स्तुति-
* सानन्दमानन्दवने वसन्तमानन्दकन्दं हतपापवृन्दम्।
वाराणसीनाथमनाथनाथं श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ||३||

श्री प्रभु स्तुति-
* मूकं करोति वाचालं पङ्गुं लङ्घयते गिरिं ।
यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ||४||

श्री देवी स्तुति-
* सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरन्ये त्रयम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||५||

श्री सूर्य स्तुति-
* जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महद्युतिं,
तमोरिसर्व पापघ्नं प्रणतोस्मि दिवाकरं ||६||

पंच पतिव्रता स्तुति-
* अहल्या द्रौपदी तारा कुंती मंदोदरी तथा।
पंचकन्या: स्मरेतन्नित्यं महापातकनाशम् ||७||

सप्त चिरंजीवी स्तुति-
* ॐ अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥
सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।
जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जितः ॐ ||८||

श्री गुरु स्तुति-
* गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः,
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः,
अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरम,
तत पदम् दर्शितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः ||९||

शैय्या(बिस्तर) से उठकर धरती पर पैर रखने से पहले बोलने का मंत्र-
* समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले,
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ||१०||

इसके पश्चात माता-पिता एवं गुरुजनों के चरणस्पर्श कर अभिवादन करें।
फिर स्नान कर ध्यान-वंदना करें।

* गजाननं भूत गणादि सेवितं,
कपिथ जंबू फल चारु भक्षणं,
उमासुतं शोक विनाशकारकम्,
नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ||११||

श्री गजनम स्तुति
* गाइये गणपति जगवंदन,
शंकर सुवन भवानी के नंदन,
सिद्धि सदन गजवदन विनायक,
कृपा सिंधु सुंदर सब लायक ||

मोदक प्रिय मुद मंगल दाता,
विद्या बारिधि बुद्धि विधाता,
मांगत तुलसीदास कर जोरे,
बसहिं रामसिय मानस मोरे ||

इसके पश्चात आप नित्य पूजा-स्तुति आदि कर आप अपना दैनिक कार्य की शुरुवात करे। ईश्वर ने चाहा तो आप को सर्वत्र विजय प्राप्त होगी।

FAQ:

* विष्णु का प्रातः स्मरण मंत्र क्या है?

विष्णु का प्रातः स्मरण मंत्र
🌿 प्रातः स्मरण विष्णु मंत्र 🌿
प्रातर्नमामि हरिमात्मसमर्थरूपं
शङ्खं गदाभयवरौघयुतं विराजन्।
पीताम्बरं कमलमालिनमादिदेवम्
चक्रारिवारणचतुष्टययुक्तनेत्रम्॥
🔹 मंत्र का अर्थ:
सुबह के समय मैं श्रीहरि विष्णु को नमन करता हूँ, जो आत्मा को शक्ति देने वाले हैं। उनके चार हाथों में शंख, गदा, अभय और वरद मुद्रा सुशोभित हैं। वे पीले वस्त्र धारण किए हुए हैं, कमलों की माला पहने हैं और समस्त सृष्टि के आदि देव हैं। उनके नेत्रों की शोभा चारों दिशाओं में व्याप्त है।
प्रातः स्मरण प्रार्थना क्या है?
🌸 प्रातः स्मरण प्रार्थना 🌸
सुबह के समय की जाने वाली प्रार्थना से दिन शुभ और सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। यह प्रार्थना भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने, मन को शांत करने और सफलता की ओर अग्रसर होने के लिए की जाती है।
🪔 प्रातः स्मरण श्लोक 🪔
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
प्रातः स्मरण मंत्र अर्थ सहित
👉 अर्थ: मेरे हाथों के अग्रभाग में माँ लक्ष्मी का वास है, मध्यभाग में माँ सरस्वती हैं और मूल भाग (हथेली के नीचे) में भगवान ब्रह्मा निवास करते हैं। इसलिए सुबह उठते ही अपने हाथों का दर्शन करना शुभ होता है।
प्रातः काल के लिए कौन सा मंत्र है?
🌞 प्रातः काल के लिए विशेष मंत्र 🌞
सुबह के समय जपे जाने वाले मंत्र दिन की शुभ और सकारात्मक शुरुआत करने में मदद करते हैं। ये मंत्र मानसिक शांति, ऊर्जा, और सफलता प्रदान करते हैं।
1️⃣ कर दर्शन मंत्र (सुबह उठते ही देखें)
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
👉 अर्थ: मेरे हाथों के अग्रभाग में माँ लक्ष्मी का वास है, मध्यभाग में माँ सरस्वती हैं और मूल भाग में भगवान ब्रह्मा निवास करते हैं। इसलिए सुबह उठते ही अपने हाथों का दर्शन करना शुभ होता है।
प्रथम स्मरण का श्लोक क्या है?
🌸 प्रथम स्मरण श्लोक 🌸
सुबह उठते ही सबसे पहले भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इससे पूरा दिन सकारात्मक और मंगलमय रहता है। प्रथम स्मरण श्लोक के रूप में विभिन्न श्लोक प्रचलित हैं, जिनका जाप सुबह करने से विशेष लाभ मिलता है।
1️⃣ कर दर्शन श्लोक (सुबह आँखें खोलते ही पढ़ें)
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
👉 अर्थ: मेरे हाथों के अग्रभाग (ऊपरी भाग) में माँ लक्ष्मी का वास है, मध्य भाग में माँ सरस्वती और मूल भाग (हथेली के नीचे) में भगवान ब्रह्मा निवास करते हैं। इसलिए सुबह उठते ही अपने हाथों का दर्शन करना शुभ होता है।

* प्रार्थना का तरीका क्या है?

सुबह नींद खुलते ही अपने दोनों हथेली जोड़कर उनको देखते हुये स्तुति करनी चाहिए।

* प्रातः स्मरण में कितने श्लोक हैं?

प्रातः स्मरण में प्रमुखता ११ श्लोक ऊपर वर्णित हैं। अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार आप पर निर्भय करता है।

* प्रातः स्मरण का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

प्रातः स्मरण का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, मानसिक शांति मिलती है, और पूरे दिन कार्यों में सफलता के साथ मन में ऊर्जा एवं उमंग प्रकाशित होता है। यह न केवल आध्यात्मिक रूप से लाभकारी है बल्कि स्वास्थ्य, मनोबल और मानसिक शुद्धता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

* प्रातः स्मरण मंत्र के लाभ-

प्रातः स्मरण मंत्रों का जाप करने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और शुद्ध विचारों के साथ होती है। यह मानसिक शांति, आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक बल प्रदान करता है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
🌞 1. मानसिक शांति और एकाग्रता
सुबह के समय इन मंत्रों का उच्चारण करने से मन शांत रहता है और दिनभर की भागदौड़ में भी एकाग्रता बनी रहती है।
🙏 2. आध्यात्मिक जागरूकता
प्रातः स्मरण मंत्र आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में सहायता करता है, जिससे व्यक्ति का आध्यात्मिक स्तर ऊँचा होता है।
🔥 3. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
इन मंत्रों का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक वातावरण बनता है।
💪 4. आत्मबल और साहस में वृद्धि
गणेश, शिव, विष्णु और देवी के स्मरण से आत्मबल बढ़ता है, जिससे जीवन की समस्याओं से लड़ने की शक्ति मिलती है।
🌿 5. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार
मंत्रों के नियमित जाप से तनाव कम होता है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
🏆 6. सफलता और समृद्धि
जब दिन की शुरुआत अच्छे विचारों और ईश्वर के स्मरण से होती है, तो कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
✨ 7. कर्मों का शुद्धिकरण
प्रातः स्मरण मंत्रों से मन, वाणी और कर्म शुद्ध होते हैं, जिससे अच्छे कर्मों की ओर प्रवृत्ति होती है।
📿 नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। 🙏✨

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